कोरोना वायरस ने विश्व के प्रत्येक लोगों और प्राणियो के जीवन को प्रभावित किया है. इनकी वजह से छोटे बच्चें, युवक-युवती, मज़दूर, किसान, कार्यरत माता-पिता एवं बुजुर्ग, सभी लोगो की जिंदगी में बदलाव आया है.
माना जाता है की नौकरी करने वाले हर वर्ग के लोग जो ऑफिस, शिक्षण-संस्थान एवं फैक्ट्री में कार्यरत थे, सब कही न कही बेरोजगार हो गये हैं. कुछ लोगो को समय पर पूरा तन्खवा नहीं मिल रहा है तो कुछ लोगो को कई महीने से कुछ भी तन्खवा भी नहीं मिली है. ऐसा भी देखा गया है की घर से दूर नौकरी करने वाले एवं बिज़नेस के सिलसिले में दूर शहर में गए लोगों को घर वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. ऐसे में यह भी आभाष होता है की कोई भी माँ अपने संतान को एवं औरत अपने पति को घर से कभी दूर नहीं जाने देंगे चाहे नौकरी के लिए हो या शिक्षा के लिऐ. सब लोग यही सोच रहे है की घर के आस-पास में ही छोटा-मोटा रोजगार कर ले जिनसे खुद को या पुरे परिवार का ख्याल रख पाएं. बहुत सारे लोग ख़ाली ज़मीन पर एवं फूल ऊगाने की जगह पर खुद से सब्जी उगाने में लगे है. इस संकट के समय सभी इस कोशिश में लगे हैं की कैसे अपने परिवार के सदस्य को पेट भर के खाना खिलाये और स्वस्थ रखे. यानी सबकी यही कोशिश है की कैसे आत्मनिर्भर बनकर रहे.
यूं देखा जाये तो इस कोरोना वायरस ने प्रकृति में भी बहोत बदलाव ला दिया है. चारो तरफ हरियाली है, हवा भी पहले से काफ़ी स्वच्छ और शीतल है. नदी एवं तालाब के पानी भी अपने आप स्वच्छ हो रहें हैं. पशु – पक्षी भी खुश है. ऐसा लगता है की हम मनुष्य के कर्मों की वजह से ही प्रकृति में बदलाव एवं अस्थिरता आया था. इनसे ये प्रतीत होता है की प्रकृति में ये क्षमता है की वो जब भी चाहे इस वातावरण में आयी अनुकूलता को अनुकूल बना सकते है.

 

@आर पी जयसवाल
सहायक प्रोफेसर
जी डी गोयनका विश्वविद्यालय, गुडगाँव