विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस डिसीज-2019 (COVID19) को एक बेहद संक्रामक महामारी रोग घोषित किया है। इसने देश भर में जनता के बीच दहशत की स्थिति पैदा कर दी है। आज तक, स्थितियों को ठीक करने के लिए कोई विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है। इसलिए, सरकार ने COVID19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सामाजिक दूरी (सोशल दिस्तन्सींग) को बढ़ावा देने के लिए पहल की है। कई महामारी विज्ञानियों और चिकित्सकों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि COVID19 को जनता के बीच फैलने से रोकने के लिए सामाजिक सुधार एक प्रभावी उपाय है। व्यक्तिगत और सामुदायिक दूरी की अधिक प्रभावशीलता के लिए, शासन ने प्रमुख शहरों और राज्य को लॉकडाउन करने की घोषणा की है, जिसने लोगोंको घरमें बंद रहने के लिए मजबूर किया है।

सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का प्रभाव:
1. आर्थिक संकट
2. घर की मांग में वृद्धि
3. बेरोजगारी में वृद्धि
4. खाद्य संकट की संभावना
5. मुद्रास्फीति में वृद्धि
6. परिवहन सुविधा की अनुपलब्धता
7. घर से काम करना
8. सार्वजनिक आयोजन स्थगित लॉकडाउन और सामाजिक भेद के

सकारात्मक पहलू:
1. प्रदूषण में महत्वपूर्ण कमी
2. परिवार के सदस्यों के भीतर स्नेह बढ़ाएँ 3. घर पर बच्चे और बूढ़े की उचित देखभाल 4. अपराध (डकैती, लूट और हत्या) के प्रलेखित मामले में कमी

सभी चीज़ों के अपने फायदे और नुक्सान तो है ही, इसलिये चीता पर जाने से सरल है की हम अपने घर पर सुरक्षित रहें और lockdown के अवसर का अपने लिये आत्म विश्लेशण के लिये इस्तेमाल करें।

राजेश प्रसाद जयसवाल
असिस्टेंट प्रोफेसर
G D Goenka University, Gurgaon